Monthly Archives: જુલાઇ, 2012

आंसू – एक अनूठी सम्पदा ……. !

आंसू – एक अनूठी सम्पदा ……. ! आंसुओं से कभी भी भयभीत मत होना।तथाकथित सभ्यता ने तुम्हें आंसुओं से अत्यंत भयभीत कर दिया है। इसने तुम्हारे भीतर एक तरह का अपराध भाव पैदा कर दिया है। जब आंसू आते हैं तो तुम शर्मिंदामहसूस करते हो। तुम्हें लगता है कि लोग क्या सोचते होंगे? मैं पुरुष …

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” ‘मै कौन हूँ’? ‘यह मनुष्य के जीवन का सबसे बुनियादी प्रश्न है’?

” ‘मै कौन हूँ’? ‘यह मनुष्य के जीवन का सबसे बुनियादी प्रश्न है’? ‘तुम्हारी अपने सम्बन्ध में सारी जानकारी उधार है’, ‘दूसरो से ली हुई है’, ‘तुमने स्वयं अपने अस्तित्वगत सत्य कि खोज नहीं की है’, ‘तुम्हे पता नहीं है कि तुम कौन हो’? ‘यही मनुष्य के जीवन क़ीबुनियादी समस्या है’! ‘बाकि सारी समस्याएं इस …

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” मन के बहुत चेहरे ” ~ ओशो : –

” मन के बहुत चेहरे ” ~ ओशो : – Q. : – ” ‘मन’, ‘बुद्धि’, ‘चित्त’, ‘अहंकार’ — ‘ये क्या अलग-अलग हैं?’ ” ” ‘ये अलग-अलग नहीं हैं’, ‘ये मन केही बहुत चेहरे हैं’ | जैसे कोई हमसे पूछे कि बाप अलग है, बेटा अलग है, पति अलग है? तो हम कहें कि नहीं, …

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” मैं ‘धार्मिकता’ ‘सिखाता’ हूं ‘धर्म’ ‘नहीं’… ” ~ ओशो

” मैं ‘धार्मिकता’ ‘सिखाता’ हूं ‘धर्म’ ‘नहीं’… ” ~ ” ‘मेरी दृष्टि में तो धर्म एक गुण है’, ‘गुणवत्ता है’ ; ‘कोई संगठन नहीं’, ‘संप्रदाय नहीं’ | ‘ये सारे धर्म जो दुनिया में हैं’— और ‘उनकी संख्या कम नहीं है’, ‘पृथ्वी पर कोई तीन सौ धर्म हैं’ — ‘वे सब मुर्दा चट्टानें हैं’| ‘वे बहते …

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“जो जागा वही बुध्ध” -ओशो

” जो ‘जागा’, वही ‘बुद्ध’ ” ~ ओशो : – ” ‘बुद्ध जागरण की अवस्था का नाम है’| ‘गौतम बुद्ध एक नाम है’| ‘ऐसे और अनेंकों नाम हैं|’ धम्मपद के अंतिम सूत्रों का दिन आ गया! लंबी थी यात्रा, पर बड़ी प्रीतिकर थी। मैं तो चाहता था-सदा चले। बुद्ध के साथ उठना, बुद्ध के साथ …

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” संतों की वाणी ” ~ ओशो

” संतों की वाणी ” ~ ओशो : – ” ‘असंतों की वाणी से सुगंध तो मिलनी कठिन है’, ‘दुर्गंध ही मिलेगी’| ‘संतों की वाणी से संतोषमिलेगा’, ‘क्योंकि संतोष सत्य की छाया है’| ” # प्रश्न :- ” संतों की वाणी सुनने या पढ़ने से मन या मस्तिष्कका तनाव दूर होता है। असंतों के कलाम …

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” ‘ओशो’ ‘गुरु नानक’ देव जी पर : –

” ‘ओशो’ ‘गुरु नानक’ देव जी पर : – ” नानक ने परमात्मा को गा-गा कर पाया। गीतों से पटा है मार्ग नानक का। इसलिए नानक की खोज बड़ीभिन्न है। पहली बात समझ लेनी जरूरी है कि नानक ने योग नहीं किया, तप नहीं किया, ध्यान नहीं किया। नानक ने सिर्फ गाया। और गाकर ही …

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” ‘मेरे प्रति भी कोई पूजा-अर्चना की भावना नहीं होनी चाहिये’|-ओशो

” ‘मेरे प्रति भी कोई पूजा-अर्चना की भावना नहीं होनी चाहिये’| ‘मेरे प्रति भी एक समझदारी से भरा’, ‘विवेकपूर्ण व्यवहार होना चाहिये’| ‘यदि जो मैं कह रहा हूं’, ‘तुम्हें सही लगता है’, ‘सार्थक लगता है’, ‘तो अवश्य ही तुम्हें दूसरों तक पहुंचाना चाहिये’| ‘जो मैं कह रहाहूं’, ‘दूसरों तक पहुंचाने की ग़लती इसलिये मत करना’ …

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” मानना और जानना ” ~ ओशो : –

” मानना और जानना ” ~ ओशो : – ” मानने के धोखे में मत पड़ना। जानने की यात्रा करो। जानो तो निश्चित देव ही है, पत्थर तो है ही नहीं। मूर्तियों में ही नहीं, पहाड़ों में भी जो पत्थर है वहां भी देवता ही छिपा है। जानने से तो परमात्मा के अतिरिक्त और कुछ …

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” प्यारे ओशो, मुझे भोजन से तृप्ति क्यों नहीं होती ? “

Q. ” प्यारे ओशो, मुझे भोजन से तृप्ति क्यों नहीं होती ? ” ‘ओशो’ :- ” हर रोज भोजन लेने से पहले चुपचाप ध्यान में बैठ जाओ। आंखें बंद कर लो और महसूस करो कि तुम्हारे शरीर को क्या चाहिए—जो भी जरूरत हो! तुमने अभी भोजन देखा नहीं, भोजन सामने भी नहीं है; तुम बस …

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